ज़िन्दगी मेरी बदल गई,
जब से मसीह को पाया है,
खिल गई है कलियाँ नई,
यीशु बहार लाया है ।

जीवन है क्या, पल ही दो पल का,
किसने है जाना, होगा क्या कल का, (2)
घड़ियां सुनहरी, फिर न लौटेंगी
मुक्त्ति और जीवन वो लाया है ।

मार्ग में हमारे, वह दर्शक रहेगा,
कदम डगमगाए, हाथ वह थामेगा, (2)
भटके हुओं को राह दिखाने,
इस धरती पर वह आया है ।

जीवन की रोटी, और अमृत जल को,
कैसी भरपूरी से देता वह हमको, (2)
लहू बहाकर पाप हमारा,
प्यारे, प्रभु ने उठाया है ।

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