ऐ बाप आसमानी, आला मुकाम तेरा,
है पाक जात तेरी है, है पाक नाम तेरा ।

जैसे कि आसमां पर, है तेरी पाक मरजी
वैसे ही इस जमी पर, हो इन्तजाम तेरा ।

रोजाना की हमारी रोटी हमें अता कर,
जारी रहे हमेशा यह फैज ऐ-आम तेरा ।

जैसे कि बख्शते हैं हम अपने मुजरिमों को,
वैसे ही बख्श हमको, बख्शीश है काम तेरा ।

मत डाल इम्तिहाँ में, तू हमको आप बचा ले,
कैद-ऐ-बदि से छूटे, मिन्नत मुलाम तेरा ।